दुनिया का पहला लकडी का उपग्रह जो आज तक किसी ने सोचा भी ना होगा 😊😊😊😊😊😊

हेल्लौ दोस्तो, मै दीपक कुमार यादव मलियाबाघ सेमरी से हूँ आज हम बात करेगें उपग्रह के बारे मे। विश्व के सारे देश धातुओ का उपग्रह बना रहे है लेकिन कोई ऐसा भी देश है जो लकडी का उपग्रह बना रहा है, जी हाँ आपने सही पढा लकडी का उपग्रह। आज हम उसी उपग्रह के बारे मे पढेंगे‌‌‌‌‌‌‌‍।

हाल ही मे दुनिया का पहला लकडी का उपग्रह न्यूजीलैंड के ‍द्वारा प्रक्षेपित  किया जाएगा।  ‌‌‍‍‌‍‍‍‍‍‍‌इस ‌उपग्रह को ‌"यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी" के द्वारा 2021 के ‌अंत ‌तक पृथ्वी की  ‌कक्षा मेे ‌प्रक्षेपित किया ‌‌जायेगा। यह ध्रुवीय सुुर्य ‌‌
समकालिक कक्षा मे परिक्रमा करेगा जो पृथ्वी से लगभग 500किमी - 600किमी की ऊचाई पर है। इस उपग्रह को अभी थर्मल वैक्यूम ‌कक्ष मे रखा गया है ताकी  वह सुखा रहे।

                 
    न्यूजीलैंड का लकडी  का उपग्रह(Wisa woodsat)

कुछ महत्वपुर्ण जानकारियाँ:-
* सबसे पहले लकड़ी का उपग्रह बनाने का ख्याल "जारी मैकीनेन " के दिमाग मे आया था।

* wisa woodsat को फ़िनलैंड मे बनाया और डिजाईन  किया गया है।

* यह एक नैनो उपग्रह है जिसकी लम्बाई, चौड़ाई ‌और ऊचाईं ‌तीनो 10 -10 सेेंमी है।

* इस उपग्रह पर सेन्सर लगाया गया है जो युरोपिये अंतरिक्ष एजेंसी के द्वारा लगाया गया है।

* इस सैटेलाइट को "रॉकेट लैब इलेक्ट्रॉन रॉकेट" के ‌‌ ‍द्वारा प्रक्षेपित ‌किया जाएगा।

* इस सैटेलाईट को न्यूजीलैंड के माहीया पेनिनसुला लॉन्च कॉमप्लेक्स के द्वारा ‍प्रक्षेेेपित ‌ किया जाएगा।

* यह सैटेलाईट अंतरिक्ष मे अंतरिक्ष यान संरचना मे प्लाइवूड जैसी सामाग्री के उपयोग का परीक्षण करने के लिये प्रक्षेपित होगा।

* जापान भी लक‌‌ड़ी का उपग्रह बना रहा है जो 2023 मे ‌‌प्रक्षेपित करेेगा।

                         आपको बता दें की इस उपग्रह पर अल्युमीनियम ऑक्साइड की पतली परत चढाई गई है ताकी लकड़ी की वाष्प को कम किया जा सके और ऑक्सीजन के क्षरणकारी प्रभाव से बचाया जा सके।


अब अन्तिम सवाल यह है की ये उपग्रह आखिर लकड़ी का ही क्यों बना? किसी मेटल का भी तो बन सकता है लेकिन यह तो लकड़ी का बना, क्यो?
                          तो चलिये हम बताते है क्यों लकडी का बना ..............
जब यह सैटेलाईट अन्तरिक्ष मे गर्मी के सम्पर्क मे , ठंढ के सम्पर्क मे , निर्वात के सम्पर्क मे या फ़िर विकिरण यानी रेडियेशन के सम्पर्क मे आता है तो इस पर क्या प्रभाव पड़ता है? , क्या यह काम कर पाता है या नहीँ।
अगर सब सही हुआ तो यह बहुत खुशी की बात होगी, और साथ ही इसमे कम लागत भी होगी ।






दीपक कुमार यादव

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